गुरुवार, मार्च 21, 2013

पशु प्रताड़ना की चिंता तो कीटों की अनदेखी क्यों

आज पशु क्रूरता निवारण में कई सरकारी गैर सरकारी संस्थाएं लगी हुई हैं लेकिन पता नहीं क्यों कीट पतंगों की सुधि नहीं ली जाती. आखिर वह भी तो कुदरत के बनाये जीव हैं और डार्विन के सिद्धांतों को माना जाये तो उनका अस्तित्व मनुष्य जाति की उत्पत्ति से बहुत पहले से है. एक मायने में वे बंदर से भी प्राचीन पूर्वजों की श्रेणी में आयेंगे.
हर दिन पता नहीं कितने करोड़ मच्छर बेमौत मारे जाते हैं. कितने ही काक्रोचों की बलि चढ़ती है.माना कि कीट-पतंगो की श्रेणी के जीव अल्पजीवी होते हैं. लेकिन क्या उन्हें स्वाभाविक मौत नसीब नहीं होनी चाहिए. उनकी हत्या के लिये दवायें खुलेआम बाजार में बिक रही हैं. उनका मूल्य उनकी मारक क्षमता के अनुरूप तय किया जाता है. कहीं कोई रोक-टोक नहीं. न जाने कितनी कंपनियां उन्हें मारने के आसान उपायों पर रात दिन शोध करा रही हैं. उनकी नन्ही सी जान सबकी आंखों में कांटा की तरह चुभती रहती है. उनके संरक्षण के लिये कोई कानून नहीं. हाल में गौरैया दिवस मनाया गया. अन्य कई पशुओं और चिड़ियाओं को राष्ट्रीय-अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठा प्रदान की जाती है. क्या आजतक किसी कीट के लिये कोई दिवस घोषित हुआ. उसके प्रति प्रेम या श्रद्धा का भाव प्रदर्शित किया गया. क्या कीट सुंदर नहीं होते. उन्हें नष्ट कर दिया जाना चाहिए. बताइये भला

---देवेंद्र गौतम