मंगलवार, अगस्त 30, 2011

Anna & his cap

अन्ना टोपी और कैंडल लाइट डिनर

जिस सड़क के अगले चौराहे पर बाजार होता है, वह किधर से आती है, यह तो पता नहीं, लेकिन इतना जरूर है कि वह हमारे बहुत करीब से गुजरती है। जब अन्ना हजारे हमारे भीतर के स्वप्न को संबोधित कर रहे थे, उसी वक्त एक दूसरे स्तर पर कुछ और भी घट रहा था।

मंगलवार, अगस्त 23, 2011

senior citizens: राजनैतिक संतों की परंपरा

भारत में जब-जब सत्ता निरंकुशता की और बढ़ी है और उसके प्रति जनता का आक्रोश बढ़ा है एक राजनैतिक संत का आगमन हुआ है जिसके पीछे पूरा जन-सैलाब उमड़ पड़ा है. महात्मा गांधी से लेकर अन्ना हजारे तक यह सिलसिला चल रहा है. विनोबा भावे, लोकनायक जय प्रकाश नारायण समेत दर्जनों राजनैतिक संत पिछले छः-सात दशक में सामने आ चुके हैं. इनपर आम लोगों की प्रगाढ़ आस्था रहती है लेकिन सत्ता और पद से उन्हें सख्त विरक्ति होती है. अभी तक के अनुभव बताते हैं कि राजनैतिक संतों की यह विरक्ति अंततः उनकी उपलब्धियों पर पानी फेर देती है.

senior citizens: राजनैतिक संतों की परंपरा

सोमवार, अगस्त 22, 2011

भ्रष्टपाल विधेयक भी लाने होगा

 ये टीम अन्ना तो हाथ धोकर भ्रष्टाचार के पीछे पड़ गयी है. लगता है कि इसका नामो-निशान ही मिटाकर दम लेगी. कोई उन्हें समझाए कि भ्रष्टाचार हर किसी के वश की बात नहीं है. यह भी एक कला है जिसे लंबी साधना के बाद हासिल किया जाता है. कुछ लोगों ने तो अपना पूरा जीवन ही इसकी साधना में होम कर दिया है. अब जीवन के इस मुकाम पर आकर वे इसे छोड़ दें...यह उचित है..? अपनी जीवन भर की साधना को वे त्याग दें. यह मुनासिब है...? इस कला के माहिर कलाकार कोई अंतरिक्ष से नहीं आये हैं. वे भी इसी मुल्क के निवासी हैं. उनके भी कुछ मौलिक अधिकार हैं.  जिस तरह मानव का मानवाधिकार होता है उसी तरह भ्रष्टाचारियों का भी भ्रष्टाधिकार होता है. उसकी रक्षा की भी व्यवस्था होनी चाहिए. यह अलग बात है कि इस विधा के कलाकारों ने तांडव नृत्य की शैली अपना ली थी. यह उनकी गलती थी. उन्हें पॉप डांस तक सीमित रहना चाहिए था. लेकिन अब गलती हो ही गयी तो इसकी इतनी बड़ी सजा कि नामो-निशान ही मिटा दिया जाये. टीम अन्ना यह जान ले कि भ्रष्टाचार रक्तबीज की तरह होता है. आप उसका गला काट सकते हैं लेकिन उसके खून के हर बूंद से एक नया भ्रष्ट पैदा होने से नहीं रोक सकते. वो तो कपील जी, दिग्विजय जी, चिदंबरम जी, मनीष जी मामले को टेकल नहीं कर पाए और हवा को आंधी बना दिया. हमारी महारानी भी बीमार पड़ गयीं वरना सदाचारियों की हर मुहीम का माकूल जवाब दिया जाता. खैर टीम अन्ना के कहने पर तो नहीं लेकिन जनता की भावनाओं का आदर करते हुए जनलोकपाल विधेयक पारित करा दिया जायेगा लेकिन हमारी भी एक शर्त होगी. इसके साथ ही एक भ्रष्टपाल विधेयक भी लाने होगा. उनके अधिकारों की रक्षा भी करनी होगी. इसमें एक चपरासी से लेकर प्रधानमंत्री तक की सुरक्षा की व्यवस्था रहेगी. एकतरफा कानून बनाना कहां का न्याय है..? यह कोई प्रजातंत्र नहीं होगा. टीम अन्ना इस शर्त को मानने के लिए तैयार हो फटाफट समझौता हो जायेगा. तुम्हारी भी जय-जय..हमारी भी जय-जय...न तुम हारे न हम हारे.  

बुधवार, अगस्त 17, 2011

मसखरे हीरो नहीं बन सकते

यह एक ध्रुव सत्य है कि हीरो मसखरी कर सकता है लेकिन मसखरे हीरो नहीं बन सकते. ठीक उसी तरह जिन्हें राजनीति की समझ नहीं हो, जो स्थितियों को सही आकलन नहीं कर सकते वे तानाशाह नहीं बन सकते. अन्ना के आंदोलन के साथ मनमोहन सरकार ने इंदिरा गांधी के अंदाज में निपटने का प्रयास किया और अपनी भद पिटा ली. अन्ना को गिरफ़्तारी और जेल का भय दिखने की कोशिश की. उनकी टीम के लोगों को तिहाड़ जेल भेज कर उनके आंदोलन को नेत्रित्वविहीन   करने की कोशिश की लेकिन देश भर में ऐसा जन सैलाब उमड़ा की सरकार के पसीने छूट गए. सात दिन की न्यायिक हिरासत की व्यवस्था की और शाम होते-होते उनको जेल से बाहर आने के लिए मिन्नतें करने लगे. एक-एक कर उनकी तमाम शर्तें स्वीकार करनी पड़ी. प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह तक अपरिपक्व बयान जारी कर आलोचना के पात्र बने. गृह मंत्री को अपनी यू टर्न लेना पड़ा. कांग्रेस के मुताबिक उसका विरोध उसकी शर्तों के आधार पर करना चाहिए. इसकी अनुमति लेकर. कांग्रेस की इस पीढ़ी को यह बात समझ में नहीं आती कि विरोध अनुमति लेकर नहीं किया जाता. अन्ना गांधीवादी और अहिंसक तथा शांतिपूर्ण आंदोलन के पक्षधर हैं इसलिए अनशन के लिए जगह देने की गुजारिश की वरना क्या माओवादियों ने कभी सरकार के पास आवेदन दिया कि वे रेल की पटरी उड़ना चाहते हैं कृपया इसकी अनुमति प्रदान की जाये. या वे पुलिस वाहन को लैंडमाइन विस्फोट कर उड़ना चाहते हैं इसकी अनुमति दी जाये. कानून के दायरे में रहकर यदि कोई शांतिपूर्ण विरोध करना चाहता है तो उसपर दमनचक्र चलाना या उसपर शर्तें लादना यह बतलाता है कि सरकार गांधी की भाषा सुनने को तैयार नहीं माओ की भाषा में बोलो तो कोई समस्या नहीं. जेपी आंदोलन के बाद बोध गया महंथ के विरुद्ध संघर्ष वाहिनी के अहिंसक वर्ग संघर्ष को भी इसी तरह कुचला गया था जिसका नतीजा बाद के वर्षों में हिंसक आंदोलनों में अप्रत्याशित वृद्धि के रूप में सामने आया और देश आजतक माओवादी और आतंकवादी हिंसा के रूप में झेल रहा है. मनमोहन सिंह जी की पूरी मंडली इस बात को नहीं समझ रही है कि इस मुद्दे को यदि अन्ना की जगह किसी हिंसक संगठन ने लपक लिया और उसे ऐसा जन समर्थन मिल गया तो क्या होगा. क्या दिल्ली पुलिस या भारतीय पुलिस उसे संभल सकेगी. दुर्भाग्य है कि देश की ऐसे अपरिपक्व और नासमझ लोगों के हाथ में है और अगले चुनाव तक इसे झेलना जनता की मजबूरी है. आज देश का बच्चा समझ रहा है कि किसके विदेशी बैंक खाते को बचाने के लिए देश की प्रतिष्ठा और एक एक गौरवपूर्ण पृष्ठभूमि वाली पार्टी की गरिमा को दावं पर लगाया जा रहा है. कहीं यह व्यक्तिगत निष्ठां पूरे संगठन की ताबूत में आखिरी कील न बन जाये. इस बात का भी ध्यान रखा जाना चाहिए.

-----देवेंद्र गौतम      

मंगलवार, अगस्त 09, 2011

खैरात बांटो और राज करो

अंग्रेजों ने एक नीति बनायीं थी बांटो और राज करो. आजाद भारत की सरकारों ने उसमें थोड़ी तब्दीली की है. इनकी नीति है-खैरात बांटो और राज करो. मैं पूछूंगा-खैरात बांटकर राहत पहुंचाई जा सकती है लेकिन इसके जरिये गरीबी दूर की जा सकती है क्या...? आप कहेंगे नहीं... लेकिन सरकारी तंत्र कहेगा हां! खौफ यह है कि गरीब जनता आर्थिक रूप से स्वावलंबी हो जाएगी तो नेताओं की सूरत और सीरत को समझने लगेगी. यही भय और यही मानसिकता गरीबी का उन्मूलन में बाधक है. प्राकृतिक संपदा के दृष्टिकोण से झारखंड देश का सबसे समृद्ध राज्य है. यहां आदिवासियों के  हितों की रक्षा के नाम पर मुख्यमंत्री पद अघोषित रूप से जनजातियों के लिए आरक्षित रहा है. लेकिन राज्य गठन के एक दशक बाद नेता घोटालों के जरिये अरबपति बन गए जनता वहीं की वहीं रही. अभी हाल में योजना आयोग ने राज्य के 24 जिलों में 14 को देश के अति गरीब जिलों में सूचीबद्ध किया है. झारखंड सरकार के लिए यह आत्ममंथन का विषय था. लेकिन ऊपर से निर्देश आया कि वहां बड़े पैमाने पर अतिरिक्त अनाज का वितरण किया जाये. ये अधिकांश जिले जनजातीय बहुल हैं. इनमें सिंहभूम जिला भी शामिल है जहां लौह और स्वर्ण अयस्क का विशाल भंडार है. जहां पूर्व मुख्य मंत्री मधु कोड़ा के कार्यकाल में चार हज़ार करोड़ का माइंस आवंटन घोटाला उजागर हुआ. झारखंड सरकार या विपक्ष के किसी नेता ने यह सवाल नहीं उठाया कि यह स्थिति क्यों है और उन जिलों के लोगों के आर्थिक उत्थान के लिए कौन सी रणनीति अपनाई जाएगी. बिचौलियों को कैसे किनारे किया जायेगा और रोजगार परक योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंचाने का क्या उपाय किया जायेगा. बस खैरात बांटो और चुनाव के समय अपने अहसान गिनाकर वोट बटोर लो. यही सत्ता सुख प्राप्त करने का बीजमंत्र है. मध्यम वर्ग पर महंगाई का बोझ डालो और गरीबों को खैरात देते रहो. उसे अपने पैरों पर खड़ा मत होने दो सत्ता पर पकड़ बनी रहेगी. नागनाथ गए तो सांपनाथ आयेंगे. मानव जाति को सत्ता से दूर रखो. यह राष्ट्र निर्माण के लिए जरूरी है.

-----देवेंद्र गौतम 

शनिवार, अगस्त 06, 2011

सितारों के आगे चलो घर बसायें

अलामा इकबाल की कल्पना साकार हुई. सितारों के आगे सचमुच और जहां निकल आये. हाल में नासा के वैज्ञानिकों ने मंगल ग्रह पर खारे पानी की मौजूदगी का पता लगा लिया है. जाहिर है कि जहां पानी होगा वहां हवा होगी और जहां यह दोनों होंगे वहां जीवन भी होगा या उसके विकसित होने की संभावना भी होगी. चांद पर भी पानी के संकेत मिले हैं.मंगल ग्रह पर पानी है यह सचमुच बहुत बड़ी खबर है. उसके खारा होने से कोई फर्क नहीं पड़ता. मीठे को खारा और खारे को मीठा बनाना तो हमारे बाएं हाथ का खेल है. अब बढती जनसंख्या कोई समस्या नहीं रह जाएगी. मानव आबादी के सरप्लस हिस्से को आराम से मंगल ग्रह पर शिफ्ट किया जा सकेगा.