शनिवार, जुलाई 30, 2011

लेस्बियन संबंधों की दर्दनाक परिणति

पश्चिम की हवा भारत के महानगरों से होती हुई अब देश के विभिन्न शहरों को प्रदूषित कर रही है. रांची की 12 वीं कक्षा की दो छात्रों की मौत के मूल में यही मामला है. दोनों २० जुलाई को रांची के अपर बाजार स्थित एक हॉस्टल से से लापता थीं. 28 जुलाई को उनका शव हरिद्वार और ऋषिकेश के बीच में स्थित सिल्ला नहर से बरामद किया गया. उनकी पहचान उनके आई कार्ड से हुई. रांची से जाने के बाद वे ऋषिकेश के एक होटल में ठहरी हुईं थीं. 24 जुलाई को उन्होंने होटल का बिल चुकता कर उसे खाली कर दिया था. दोनों दुमका की रहने वाली थीं. 10 वीं कक्षा तक वह डीपीएस बोकारो में पढ़ती थीं. इसके बाद इसके बाद निकिता ने 10 वीं में 98 प्रतिशत अंक लेन के नाते बोकारो के सबसे प्रतिष्ठित चिन्मय स्कूल में नामांकन कराया जबकि मौसम का नामांकन डीपीएस, रांची में कॉमर्स संकाय में हुआ.

रविवार, जुलाई 24, 2011

काले कुत्ते ने जंगल में दिखाया रास्ता

कुछ घटनाएं इतनी हैरत-अंगेज़ होती हैं कि उन्हें दैवी प्रभाव मानने में आधुनिक सोच आड़े आती है और वैज्ञानिक व्याख्या संभव नहीं होती. ऐसी एक घटना हमारे साथ 1993-94 के दौरान पेश आई थी जब हम गोमिया के घने जंगलों में रास्ता भूल गए थे. विनोबा भावे विश्वविध्यालय के एन्थ्रोपोलोजी के विभागाध्यक्ष अंसारी साहब ने मेरे साथ गोमिया के लुगु पहाड़ पर चलने का प्रोग्राम बनाया था. घने जंगलों से भरे उस पहाड़ की साढ़े तीन हज़ार फुट ऊंचाई पर स्थित गुफाओं की यात्रा मैं 1987-८८ के दौरान कई बार कर चुका था और कमलेश्वर जी  के संपादन में उन दिनों प्रकाशित होने वाली मासिक पत्रिका गंगा के लिए उसपर स्टोरी भी लिख चुका था. लिहाज़ा बेरमो कोयलांचल में मुझे उस रहस्यमय पहाड़ का जानकार माना जाता था.
                                                 रहस्य-रोमांच 
         

शनिवार, जुलाई 16, 2011

यह महंगाई तो सरकार प्रायोजित है



एक सोची समझी रणनीति का नतीजा 

16 जुलाई को दैनिक जागरण के प्रथम पृष्ठ पर दो ख़बरों को टॉप बॉक्स बनाया गया था. पहली खबर थी-32 हज़ार में नैनो मकान और दूसरी खबर थी-720  रुपये में मिलेगा गैस सिलेंडर. पहली खबर बीपीएल के लिए थी और दूसरी एपीएल के लिए. एक को सौगात दूसे पर बोझ. दरअसल यही कांग्रेसनीत यूपीए सरकार का गुप्त एजेंडा है. वोटों का एक नया समीकरण बनाने का प्रयास. बांटों और राज्य करो की ब्रिटिशकालीन नीति का नया संस्करण. आजादी के बाद लंबे समय तक ब्रह्मण, हरिजन और मुसलमान के जातीय समीकरण के आधार पर सत्तासुख प्राप्त कार चुकी कांग्रेस इस वोट बैंक के खिसकने के बाद अब बीपीएल-एपीएल के आधार पर समाज को नए सिरे से विभाजित कर बीपीएल मतदाताओं का समर्थन पाने का ख्वाब देख रही है. उसके गणित के मुताबिक बीपीएल संख्या में ज्यादा हैं. वे साथ हो लें तो राजपाट सुरक्षित हो जायेगा. इसीलिए सरकार जानबूझकर सब्सीडी हटा रही है और महंगाई बढ़ा रही है. वह मान चुकी है कि एपीएल का वोट उसे चाहिए ही नहीं. इसीलिए महंगाई के खिलाफ आवाज़ उठने पर उसके नुमाइंदे पूरी बेशर्मी के साथ सीना ठोक कर कहते हैं कि महंगाई तो बढ़ेगी.
       

बुधवार, जुलाई 13, 2011

खजाने और भी हैं पद्मनाभस्वामी मंदिर के सिवा



वर्ष और अंक तो याद नहीं है लेकिन 70  के दशक में साप्ताहिक हिंदुस्तान में एक लेख पढ़ा था जिसमें कंचनजंघा चोटी के पास दुनिया के सबसे बड़े खजाने के संबंध में एक विस्तृत लेख छपा था. इसकी जानकारी ब्रिटिश शासन काल में एक ताम्रपत्र से मिली थी. ताम्रपत्र को प्राचीन भाषाओं के जानकार लोगों ने पढ़कर उसका अनुवाद किया था. उसके अनुसार यह विश्व का सबसे बड़ा खजाना है जिसे राजा राम सिंह ने मानव कल्याण के लिए रखवाया है. इस खजाने की रक्षा ऐसे सर्प करते हैं जिनके सिर पर दीपक जलता रहता है. जब दुनिया विनाश के कगार पर पहुंच जाएगी तो किसी खास व्यक्ति के पहुंचने पर इसके दरवाजे अपने आप खुल जायेंगे और वह इस खजाने के जरिये विश्व का पुनर्निर्माण करेगा.
       

सोमवार, जुलाई 11, 2011

छठे तहखाने का रहस्यलोक

खजाने में बैठी तबाही 

तिरुअनंतपूरम  के पद्मनाभ स्वामी मंदिर के पांच तहखानों की दौलत आराम से निकल आई. परिसंपत्तियों की सूची भी बन गयी लेकिन जब छठे तहखाने को खोलने की बारी आई तो उसमें तिलस्मी इंतजामात की बात सामने आने लगी. कोलकाता के एक दैनिक अखबार ने 1930  में किसी दैनिक अखबार में प्रकाशित एमिली गिलक्रिस्ट हैच नामक लेखक के लेख का हवाला देते हुए एक दिलचस्प रिपोर्ट प्रकाशित की है. लेख के मुताबिक 1908 में कुछ लोगों ने छठे तहखाने का दरवाजा खोला तो उन्हें साँपों की फौज के साथ कई सिरों वाला किंग कोबरा नज़र आया. वे जान बचाकर भाग निकले. ऐसी किंवदंती है कि कई सिरों वाला और कांटेदार जिह्वा बाला एक विशाल किंग कोबरा सांप मंदिर के खजाने का रक्षक है.

रविवार, जुलाई 10, 2011

खजाने की चाबी लुटेरों को...नहीं...बिल्कुल नहीं


पद्मनाभस्वामी मंदिर के तहखानों से निकला खज़ाना सामने आने के बाद अब देश के 550  रियासतों, हजारों मंदिरों-मठों, पुराने किलों और रहस्यमयी गुफाओं में कैद अकूत खजानों की और बरबस ध्यान चला जाता है. गनीमत है कि इनके जनहित में उपयोग की संभावनाओं पर विचार करने का जिम्मा उच्चतम न्यायालय ने लिया है. अभी सत्ता में बैठे लोग घोटालों और भ्रष्टाचार के आरोपों से घिरे होने के कारण आम जनता का विश्वास खो चुके हैं. कई राजघरानों के खजाने सरकार पहले भी ले चुकी है लेकिन उनके उपयोग की कोई जानकारी नहीं है.

बुधवार, जुलाई 06, 2011

बाबा रे बाबा! विदेशी बैंकों से ज्यादा धन तो धर्मस्थलों में पड़ा है

केरल के पद्मनाभ स्वामी मंदिर का एक तहखाना खुलना बाकी है और अभी तक एक लाख करोड़ का धन सामने आ चुका है. फिलहाल राजघराने के अनुरोध पर सुरक्षा के दृष्टिकोण से सरकार ने अगले तहखाने से निकलने वाले धन का विवरण सार्वजनिक न करने का निर्णय लिया है. साईं बाबा के देहावसान के बाद उनके तहखाने से मिली खरबों की संपत्ति के मालिकाना हक का विवाद चल ही रहा है. जाहिर है कि देश के मंदिरों, मसजिदों, गुरुद्वारों, गिरिजाघरों बी एनी धर्मस्थलों में इतना धन पड़ा हुआ है कि उसका अनुमान भी नहीं लगाया जा सकता. यह विदेशी बैंकों में जमा भारतीय काला धन से हजारों या लाखों गुना ज्यादा है और अनुपयोगी पड़ा है.

शुक्रवार, जुलाई 01, 2011

रुपया बना चिल्लर..चिल्लर बना रुपया

आज कचहरी के पास फटे पुराने नोट बदलने वाले के काउंटर पर पुराने सिक्कों के बीच चवन्नी को भी तांबे और अलुमिनियम के पुराने सिक्कों के बीच पूरे सम्मान के साथ प्रदर्शित देखा. जिज्ञासावश पूछ बैठा कि इसकी कीमत क्या है. उसने बताया दो रुपये. उसमें आजादी के बाद बंद हुए और प्रचलन से बाहर हुए सिक्के थे. मुझे ख़ुशी हुई कि भारतीय बैंक जिस सिक्के को उसकी निर्धारित कीमत पर वापस लेने की अंतिम तिथि को पीछे छोड़ आये हैं निजी  क्षेत्र में उसकी आठ गुनी कीमत लग रही है. पुराना एक पैसा, दो पैसा, तीन पैसा. एक आना, दो आना, पांच पैसा. दस पैसा के सिक्के दो रुपये में बिक रहे हैं. यानी सरकार ने जिन्हें चिल्लर की हैसियत से ख़ारिज कर दिया वे रुपये में परिणत हो चुके हैं. दूसरी तरफ एक रुपये का सिक्का जिसे कभी बाज़ार में रुपये की हैसियत प्राप्त थी आज चिल्लर में परिणत हो चुका है.