मंगलवार, अगस्त 09, 2011

खैरात बांटो और राज करो

अंग्रेजों ने एक नीति बनायीं थी बांटो और राज करो. आजाद भारत की सरकारों ने उसमें थोड़ी तब्दीली की है. इनकी नीति है-खैरात बांटो और राज करो. मैं पूछूंगा-खैरात बांटकर राहत पहुंचाई जा सकती है लेकिन इसके जरिये गरीबी दूर की जा सकती है क्या...? आप कहेंगे नहीं... लेकिन सरकारी तंत्र कहेगा हां! खौफ यह है कि गरीब जनता आर्थिक रूप से स्वावलंबी हो जाएगी तो नेताओं की सूरत और सीरत को समझने लगेगी. यही भय और यही मानसिकता गरीबी का उन्मूलन में बाधक है. प्राकृतिक संपदा के दृष्टिकोण से झारखंड देश का सबसे समृद्ध राज्य है. यहां आदिवासियों के  हितों की रक्षा के नाम पर मुख्यमंत्री पद अघोषित रूप से जनजातियों के लिए आरक्षित रहा है. लेकिन राज्य गठन के एक दशक बाद नेता घोटालों के जरिये अरबपति बन गए जनता वहीं की वहीं रही. अभी हाल में योजना आयोग ने राज्य के 24 जिलों में 14 को देश के अति गरीब जिलों में सूचीबद्ध किया है. झारखंड सरकार के लिए यह आत्ममंथन का विषय था. लेकिन ऊपर से निर्देश आया कि वहां बड़े पैमाने पर अतिरिक्त अनाज का वितरण किया जाये. ये अधिकांश जिले जनजातीय बहुल हैं. इनमें सिंहभूम जिला भी शामिल है जहां लौह और स्वर्ण अयस्क का विशाल भंडार है. जहां पूर्व मुख्य मंत्री मधु कोड़ा के कार्यकाल में चार हज़ार करोड़ का माइंस आवंटन घोटाला उजागर हुआ. झारखंड सरकार या विपक्ष के किसी नेता ने यह सवाल नहीं उठाया कि यह स्थिति क्यों है और उन जिलों के लोगों के आर्थिक उत्थान के लिए कौन सी रणनीति अपनाई जाएगी. बिचौलियों को कैसे किनारे किया जायेगा और रोजगार परक योजनाओं का लाभ आम जनता तक पहुंचाने का क्या उपाय किया जायेगा. बस खैरात बांटो और चुनाव के समय अपने अहसान गिनाकर वोट बटोर लो. यही सत्ता सुख प्राप्त करने का बीजमंत्र है. मध्यम वर्ग पर महंगाई का बोझ डालो और गरीबों को खैरात देते रहो. उसे अपने पैरों पर खड़ा मत होने दो सत्ता पर पकड़ बनी रहेगी. नागनाथ गए तो सांपनाथ आयेंगे. मानव जाति को सत्ता से दूर रखो. यह राष्ट्र निर्माण के लिए जरूरी है.

-----देवेंद्र गौतम 

1 टिप्पणी:

  1. बहुत अच्छा आलेख लिखा है आपने!
    "नागनाथ गए तो सांपनाथ आयेंगे. मानव जाति को सत्ता से दूर रखो. यह राष्ट्र निर्माण के लिए जरूरी है."

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