शनिवार, जुलाई 30, 2011

लेस्बियन संबंधों की दर्दनाक परिणति

पश्चिम की हवा भारत के महानगरों से होती हुई अब देश के विभिन्न शहरों को प्रदूषित कर रही है. रांची की 12 वीं कक्षा की दो छात्रों की मौत के मूल में यही मामला है. दोनों २० जुलाई को रांची के अपर बाजार स्थित एक हॉस्टल से से लापता थीं. 28 जुलाई को उनका शव हरिद्वार और ऋषिकेश के बीच में स्थित सिल्ला नहर से बरामद किया गया. उनकी पहचान उनके आई कार्ड से हुई. रांची से जाने के बाद वे ऋषिकेश के एक होटल में ठहरी हुईं थीं. 24 जुलाई को उन्होंने होटल का बिल चुकता कर उसे खाली कर दिया था. दोनों दुमका की रहने वाली थीं. 10 वीं कक्षा तक वह डीपीएस बोकारो में पढ़ती थीं. इसके बाद इसके बाद निकिता ने 10 वीं में 98 प्रतिशत अंक लेन के नाते बोकारो के सबसे प्रतिष्ठित चिन्मय स्कूल में नामांकन कराया जबकि मौसम का नामांकन डीपीएस, रांची में कॉमर्स संकाय में हुआ.


दोनों के बीच अंतरंग संबंध था.   
mausam

nikita
           कहते हैं कि उनके अभिभावकों को इसकी जानकारी थी. उन्हें जानबूझ कर अलग किया गया था. लेकिन दोनों मोबाईल पर घंटों बात करती रहती थीं. दोनों किसी को बताये बिना ट्रेन पकड़ कर एक दूसरे के पास पहुंच जाती थीं. उनमें एक राधा बनती थी दूसरी कृष्ण. उनके हॉस्टल से जो बातें छान कर आ रहीं हैं उनके मुताबिक वे हॉस्टल का कमरा खाली होने का इन्तजार करती थीं. जैसे हीं रूम मेट बहार निकली वह दरवाज़ा बंद कर लेती थीं और बाद में बहुत दस्तक देने के बाद ही बाहर आती थीं. उनकी सहेलियां सांकेतिक रूप से जो बताती हैं उसके मुताबिक उनके बीच समलैंगिक संबंध था और यह साडी हदों को पार कर चुका था. उन्हें पता था कि अंततः उन्हें एक दूसरे से जुदा हो जाना पड़ेगा. भारत में अभी पश्चिम की हवा इतनी हमवार नहीं हुई है कि उनके संबंधों को सामाजिक मान्यता मिल जाये. संभवतः इसीलिए उन्होंने साथ मरने का निश्चय कर लिया. निकिता ने 20 जुलाई को ही अपने पिता को एसएमएस कर जानकारी दी थी कि वह आत्महत्या करने जा रही है. मेसेज भेजने के बाद उसने मोबाईल का स्विच ऑफ कर दिया था. 
                    दोनों छात्राओं का अंत भविष्य के खतरनाक संकेत दे रहा है. इन दो होनहार छात्राओं को आत्महत्या का निर्णय नहीं लेना पड़ता यदि उन्हें अपने संबंधों को सामाजिक स्वीकृति मिलने की उम्मीद होती. वह समझाने-बुझाने या वापस लौटने की सीमा से काफी आगे बढ़ चुकीं थीं. भारत में पहली लेस्बियन शादी अभी गुडगांव में सविता और बीना नामक दो युवतियों के बीच इसी 22 जुलाई को हुई है. उनकी शादी को कानूनी मान्यता मिल गयी है लेकिन सामाजिक मंजूरी नहीं मिली है. उनके परिजन उन्हें जान से मार डालने की धमकियां दे रहे हैं. वह छुपती फिर रही हैं. इस तरह के संबंधों का दायरा आने वाले समय में और भी विस्तार की ओर बढ़ने लगे तो कोई हैरत की बात नहीं होगी.

----देवेंद्र गौतम                

2 टिप्‍पणियां:

  1. यह भी एक मानसिक विकार है.....विचारणीय पोस्ट.

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  2. इससे पहले इस घटना के बारे में ऐसा कुछ नहीं पता था .....मगर इतना जरूर कहूंगा ...कि एक -लिंगी या विपरीतलिंगी ,कोई भी आकर्षण संभवतः इतना भी घृणित नहीं होता जितना इसे समझा जाता है....समझाए जाने के अनेक रास्ते होते हैं....और वो रास्ते जब आप बंद कर देते हो तो.....यह हो जाता है,जो हम नहीं चाहते कि हो....

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