सोमवार, जुलाई 11, 2011

छठे तहखाने का रहस्यलोक

खजाने में बैठी तबाही 

तिरुअनंतपूरम  के पद्मनाभ स्वामी मंदिर के पांच तहखानों की दौलत आराम से निकल आई. परिसंपत्तियों की सूची भी बन गयी लेकिन जब छठे तहखाने को खोलने की बारी आई तो उसमें तिलस्मी इंतजामात की बात सामने आने लगी. कोलकाता के एक दैनिक अखबार ने 1930  में किसी दैनिक अखबार में प्रकाशित एमिली गिलक्रिस्ट हैच नामक लेखक के लेख का हवाला देते हुए एक दिलचस्प रिपोर्ट प्रकाशित की है. लेख के मुताबिक 1908 में कुछ लोगों ने छठे तहखाने का दरवाजा खोला तो उन्हें साँपों की फौज के साथ कई सिरों वाला किंग कोबरा नज़र आया. वे जान बचाकर भाग निकले. ऐसी किंवदंती है कि कई सिरों वाला और कांटेदार जिह्वा बाला एक विशाल किंग कोबरा सांप मंदिर के खजाने का रक्षक है.


छठे दरवाज़े का तहखाना खुला तो वह पानी के अंदर से बिजली की रफ़्तार से निकलेगा और सबकुछ तहस-नहस कर देगा. एक किंवदंती यह भी है कि छठे तहखाने का संबंध अरब सागर से है और उसका दरवाजा खुलते ही तेज़ रफ़्तार से पानी भरने लगेगा और प्रलय आ जायेगा. 136  साल पहले ऐसी नौबत आई थी. मंदिर के कर्मचारियों ने छठा तहखाना खोलने की कोशिश की तो तो मंदिर में तेज़ रफ़्तार से पानी भरने की आवाज़ आने लगी. उन्होंने घबराकर दरवाज़ा बंद कर दिया. शहर के लोगों का भी इस तहखाने का अरब सागर से संबंध होने की किंवदंती पर  विश्वास है. सभी छः तहखाने मुख्य देवता की मूर्ति के चारो तरफ है. एक मान्यता यह भी है की छठा तहखाना   महात्माओं की समाधि है और उसके खुलने पर वे जाग जायेंगे और विनाश हो जायेगा. एक और मान्यता यह है कि इसका रिश्ता मंदिर की नींव से है. उसमें लोहे की एक दीवार है इसके साथ किसी तरह की छेड़छाड़ हुई तो मंदिर भरभराकर गिर जायेगा.
               इन तमाम किंवदंतियों और मान्यताओं से परे कई सवाल उठते हैं जिनका जवाब मुश्किल है. कहा जाता है कि पुराने ज़माने में खजानों की रक्षा के लिए तंत्रविद्या के जरिये नागों का पहरा बिठाया जाता था और क्ग्मं कारीगरों के जरिये तिलस्मी इंतजामात किये जाते थे. लेकिन प्रश्न उठता है कि यदि ऐसा किया जाता था और इस मंदिर में भी किया गया है तो खजाने के रक्षक नागराज ने पांच तहखानों का खजाना निकालने कैसे दिया. क्या उनका पहरा सिर्फ छठे तहखाने पर बिठाया गया था जिसके अंदर क्या है किसी को पता नहीं. पांच तहखानों के खजाने के लुटने पर उन्हें कोई ऐतराज नहीं था. नागराज हाड-मांस के नहीं हो सकते क्योंकि लोगों का कहना है कि तहखाने में ओक्सीजन की मात्र बहुत कम है और वैज्ञानिक सत्य है कि ओक्सीजन के बिना कोई जीव जीवित नहीं रह सकता. दूसरी बात यह कि यदि इस तहखाने का संबंध समंदर से या मंदिर की बुनियाद से है और जरा सा छेड़छाड़ होने पर जल प्रलय या जलजला आ जायेगा तो तबाही का यह रास्ता क्यों बनाकर रखा गया था. खजाने को बचाने के लिए ऐसा किये जाने के तर्क में कोई दम नहीं है. खजाने तक तो लोग बिना किसी रोकटोक के पहुंच गए. जहां तक  महान आत्माओं का सवाल है यदि धार्मिक मान्यताओं पर यकीन करें तो वह किसी का नुकसान नहीं करतीं. वह तो जन कल्याण करती हैं. फिर दरवाज़ा खुलने पर वो तबाही क्यों मचएंगिन समझ से परे है. इतना तय है कि छठे तहखाने में कुछ ऐसा रहस्य जरूर है जिसे उजागर होने से रोकने के लिए एक भय का माहौल बनाया गया है. राजघराने के वारिसों ने इस मंदिर के खजाने पर अपनी किसी तरह की दावेदारी से इनकार किया है. सुप्रीम कोर्ट में अपने वकील के जरिये उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए यह बात कही है. बहरहाल छठे तहखाने के रहस्य का उजागर होना जरूरी है. जनश्रुतियों का आदर करना उचित है लेकिन रहस्य को कुलने से रोका जाना भी उचित नहीं है. यदि तहखाने में सचमुच कई फणों वाला किंग कोबरा मौजूद है तो वह उस खजाने का सबसे बेशकीमती नगीना है क्योंकि सांपों की यह नस्ल आज दुनिया के किसी भी हिस्से में मौजूद नहीं है.



देवेंद्र गौतम

3 टिप्‍पणियां:

  1. वाह! आपने कई फणों वाला किंग कोबरा नामक बेशकीमती नगीना ही खोज डाला है खजाने में.

    सुन्दर प्रस्तुति के लिए आभार.

    मेरे ब्लॉग पर आने में कोई अटकाव तो नहीं हो गया है देवेन्द्र भाई.
    पर आप तो खजाना खोजी हैं,कोई न कोई खजाना अवश्य खोज ही लेंगें.

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  2. vah keya lekha hai paad ke bahut he aacha laga
    good keep it up

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