मंगलवार, जून 28, 2011

ये इंटरनेट की भाषा है जनाब!

स्कूल की स्पेलिंग क्या होती है? एससीएचओओएल या फिर एसकेयूएल? पहली स्पेलिंग किताबी है और दूसरी इंटरनेट पर प्रचलित यूनिकोड फौंट में ट्रांसलिटरेशन की. इंटरनेट पर किताबी स्पेलिंग नहीं चलती. यह पूरी तरह शब्दों के उच्चारण से उत्पन्न होने वाली ध्वनि पर आधारित होती है. यह पूरी तरह वैज्ञानिक है और अंतर्राष्ट्रीय स्तर  पर मान्य भी. लेकिन कल रांची के जिला शिक्षा पदाधिकारी की मौजूदगी में एडमिशन टेस्ट के दौरान जब एक बच्ची ने पूछे गए शब्दों की स्पेलिंग इंटरनेट की भाषा के आधार पर बताई तो डीईओ साहब पूरी तरह उखड गए. उन्होंने शिक्षकों को बेतरह फटकार लगायी.


नप जाने की धमकी डी. बच्ची को भी पढाई पर ध्यान देने को कहा. हांलाकि उसका एडमिशन ले लिया गया. रांची के एक सम्मानित दैनिक अखबार ने इस प्रकरण पर खूब चटखारे ले-लेकर छः कॉलम की एक खबर बनायीं. उसमें एक कार्टून भी डाला. 
      इस प्रकरण में दिलचस्प बात यह है कि न फटकार लगाने जिला शिक्षा अधीक्षक ने यह जानने की कोशिश की और न ही फटकार सुनने वाले शिक्षक यह समझ पाए कि बच्ची इस तरह का स्पेलिंग क्यों बता रही है. यहाँ तक कि अखबार के रिपोर्टर, उपसंपादक और स्थानीय संपादक भी मामले को समझ नहीं पाए. यह कंप्यूटर और इंटरनेट के प्रति उनकी अरुचि या अज्ञानता को दर्शाता है. मैं ये नहीं कहता कि जिला शिक्षा अधीक्षक और शिक्षकों से लेकर अखबार के संपादक तक कंप्यूटर के बारे में शून्य ज्ञान रखने वाले होंगे लेकिन इतना तय है कि इंटरनेट प्रचलित फौंट और हिंदी लेखन के लिए प्रदान की गयी सुविधाओं से अवश्य अनभिग्य रहे होंगे.उन्हें इसका ज्ञान होता तो वे बच्ची को समझाते कि यह स्पेलिंग अभी स्कूली शिक्षा के दायरे में प्रचलित नहीं है. यह उस वक़्त मौजू होगा जब शिक्षा पूरी तरह कम्प्यूटरीकृत हो जाएगी. अभी किताबी भाषा की स्पेलिंग ही याद रखनी होगी. इसीलिए कहा गया है कि अल्पज्ञान घातक होता है. 

------देवेंद्र गौतम 

3 टिप्‍पणियां:

  1. इंटरनेट प्रचलित फौंट और हिंदी लेखन और पूर्व प्रचलित फौंट और हिंदी लेखन में अन्तर पर अच्छा लेख.

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  2. अच्छा विश्लेण किया है आपने... इस सार्थक लेख के लिए आपको हार्दिक बधाई।

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