मंगलवार, फ़रवरी 22, 2011

.जीव ही जीव का भक्ष्य होता है

 मित्रो ! अहिंसा को परमो धर्म बताया जाता है. जीव हत्या की निंदा की जाती है. लेकिन कोई यह बतलाये कि इस धरती पर क्या कोई ऐसा जीव है जो निर्जीव को भक्ष्य बनाकर अपने जीवन की रक्षा करता हो....? केचुए भी मिट्टी खाते हैं तो उनका आहार उसके अन्दर मौजूद जीवाणु होते हैं. शाकाहार और मांसाहार पर अक्सर चर्चा होती है. क्या शाक-शब्जियों में जीव नहीं होता....? क्या वे अनायास ही बढ़ते जाते हैं....? फल तोड़े जाते हैं या फसल काटी जाती है तो क्या पेड़-पौधों को दर्द नहीं होता...? उनकी रगों से खून नहीं निकलता. निकलता है. यह अलग बात है क़ी उनका रंग हमारी तरह लाल नहीं होता. वैज्ञानिक खोज बताती है कि एक पत्ता भी तोडा जाता है तो पेड़ जोरों से चीखते हैं. यह अलग बात है कि हम उन्हें सुन नहीं पाते. लेकिन ऐसे वैज्ञानिक उपकरण हैं जिनके ज़रिए उनकी चीख सुनी जा सकती है. फिर क्या हिंसा क्या अहिंसा! इस सृष्टि क़ी बुनियाद ही हिंसा पर टिकी है. किसी जीव का जन्म भी बिना हिंसा के नहीं होता. यही सत्य है. गौतम बुद्ध, महात्मा गाँधी जैसे अहिंसा के पैरोकार संतों ने दरअसल मानव जीवन को अनुशासित रखने के लिए अवैज्ञानिक बातें कही हैं. वे अति आदर्शवादी थे.खासतौर पर अहिंसा के पक्ष में कही गयी उनकी बातें सुनने में अच्छी लगती हैं लेकिन व्यावहारिक नहीं हैं.
---देवेन्द्र गौतम

4 टिप्‍पणियां:

  1. अगर हमें शाकाहार अच्‍छा लगता है तो मांसाहार की नि‍न्‍दा ना करें। और मांसाहारी हैं तो मांस खाने के पक्ष में बहाने ना गढ़ें। दरअसल अगर हम पालक खाते हैं तो आनन्‍द से नहीं... उसे खाना सहन करते हैं, फि‍र दूसरों को उसके गुण बताते हैं और बकरे के मटन को, जो व्‍यक्‍ि‍त स्‍वाद लेकर खा रहा है उसकी नि‍न्‍दा करते हैं। आप जो खाना है खाईये उसके परि‍णामों को सोच सोच कर ही क्‍यों परेशान होना। जो होगा देखी जायेगी....

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  2. राजे शा साहब! आप सबको साथ लेकर चलना चाहते हैं. आपके विचार उत्तम हैं.....मैंने तो बिना लाग लपेट के अपनी बात कह दी......बहरहाल...... मेरे ब्लाग पर आपका स्वागत है.

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  3. वैज्ञानिक खोज बताती है कि एक पत्ता भी तोडा जाता है तो पेड़ जोरों से चीखते हैं. यह अलग बात है कि हम उन्हें सुन नहीं पाते. लेकिन ऐसे वैज्ञानिक उपकरण हैं जिनके ज़रिए उनकी चीख सुनी जा सकती है. फिर क्या हिंसा क्या अहिंसा! इस सृष्टि क़ी बुनियाद ही हिंसा पर टिकी है. किसी जीव का जन्म भी बिना हिंसा के नहीं होता. यही सत्य है.

    बिलकुल .....!!

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  4. हरकीरत हीर जी!
    आप मेरे ब्लॉग पर आयीं, मेरे विचारों पर सहमति जताई..बहुत अच्छा लगा. आपसे निवेदन है कि स्नेह बनाये रखें.

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