शुक्रवार, जनवरी 28, 2011

हनुमान चालीसा पर एक सवाल

शायद ही कोई हिन्दू होगा जिसने अपने जीवन में कभी हनुमान चालीसा नहीं पढ़ा हो. तुलसीदास रचित यह काव्य रचना हिन्दू समाज में संभवतः सबसे लोकप्रिय प्रार्थना है. भले ही कुछ लोग इसका नियमित पाठ न करते हों या प्रगतिशीलता के दायरे से बाहर निकाल दिए जाने के भय से सार्वजनिक रूप से इसके पाठ से कतराते हों लेकिन संकट में फंसने या भयभीत होने पर वे भी अचानक मन ही मन इसका पाठ करने लगते हैं. मैंने भी कई मौकों पर इसका पाठ किया है. लेकिन इसकी एक पंक्ति पर आकर मैं अक्सर अटक जाता हूँ.
हनुमान चालीसा की वह पंक्ति है भीम रूप धरी असुर संहारा. यानी हनुमान ने भीम का रूप धरकर असुरों का संहार किया. इस पंक्ति के जरिये तुलसीदास ने भीम को हनुमान से श्रेष्ठ बतला दिया है. मेरे खयाल में यह हनुमान के साथ नाइंसाफी है.निश्चित रूप से भीम हनुमान की ही तरह पवनदेव के पुत्र थे. वीर थे. गदायुद्ध में पारंगत थे. लेकिन हनुमान के व्यक्तित्व के मुकाबले वे कहीं नहीं ठहरते. हनुमान के अन्दर रंचमात्र भी अभिमान नहीं था. भीम के अभिमान को नष्ट करने के लिए उन्होंने उनके रास्ते में अपनी पूंछ रख दी थी और उसे हटाने का आग्रह कर उनके पानी का अहसास करा दिया था. वे विलक्षण शक्तियों के मालिक थे. लेकिन उन्हें अपनी शक्तियां याद नहीं रहती थीं. उन्हें याद दिलाना पड़ता था. वे लघु से लघु और विकराल से विकराल रूप धारण कर सकते थे. हवा में उड़ सकते थे. भीम कृष्ण के उतने बड़े भक्त नहीं थे जितने हनुमान राम के. भीम वीर थे लेकिन उनके पास चमत्कारिक शक्तियां नहीं थीं. जबकि हनुमान अपनी चमत्कारिक शक्तियों और राम के प्रति अपने समर्पण के कारण भगवान शिव का अवतार और पूजनीय मने गए. हनुमान त्रेता युग में हुए थे और भीम द्वापर में. भीम को हनुमान का छोटा भाई मन जाता है. लेकिन दोनों में ज़मीन आसमान का अंतर है. ऐसे में असुरों के संहार के लिए हनुमान का भीम जैसा रूप धारण करना कुछ गले के नीचे नहीं उतरता. चूँकि तुलसी का रचनाकाल मध्ययुग था. इसलिए संभव है की वे हनुमान और भीम के कार्यकाल के अंतर को नज़रंदाज़ कर गए हों.

1 टिप्पणी:

  1. आपकी शंका जायज है पर मैं आपको बता दूँ कि भीम का अर्थ होता है "विशालकाय"
    महाभारत के भीम का नाम भी उनके विशाल शरीर के कारण रखा गया था|तुलसीदास जी ने हनुमान और भीम की तुलना नहीं की है

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